कहीं आपके घर की रजिस्ट्री नकली तो नहीं, इंदौर कलेक्टर ने पकड़ा फर्जीवाड़ा, FIR के निर्देश

कलेक्टर आशीष सिंह ने इंदौर में रजिस्ट्री का बड़ा कांड उजागर किया है। वे अब इस संबंध में एफआईआर करवाने वाले हैं। इस मामले में कई फर्जी रजिस्ट्रियां मिली हैं जिनकी कीमत सौ करोड़ रुपए से अधिक की है। लोगों को पता भी नहीं कि उनके घर की फर्जी रजिस्ट्री करके वह घर किसी और को बेच दिया गया है।

कैसे हो रहा फर्जीवाड़ा
जांच में यह सामने आया कि इसमें खाली पड़े प्लाटों को निशाना बनाया जाता है। एक व्यक्ति के मकान की फर्जी रजिस्ट्री तैयार करके उसके आधार पर वह मकान दूसरे के नाम पर कर दिया जाता है। यदि वास्तविक मकान मालिक किसी अन्य शहर में रहता है या फिर दूसरा मकान मालिक जब तक प्लाट पर कब्जा शुरू कर नहीं करता तब तक फर्जीवाड़ा समझ में ही नहीं आता है।

कई महीनों से मिल रही शिकायतें
वरिष्ठ जिला पंजीयक डॉ. अमरेश नायडू ने बताया कि पंजीयन विभाग में आमजन के द्वारा करवाई गई रजिस्ट्रियों को रिकार्ड में सुरक्षित रखा जाता है, जिसमें आमजन की पूरी जीवनभर की कमाई लगी होती है। पंजीयन विभाग के मोती तबेला कलेक्टर कार्यालय स्थित रिकार्ड रूम के संबंध में कलेक्टर अशीष सिंह को विगत कई महीनों से रिकार्ड के संबंध में गंभीर शिकायतें मिल रही थी। ना केवल रजिस्ट्रियों में हेर-फेर की शिकायतें लगातार मिल रही थी, बल्कि इस तरह की शिकायतें भी मिल रही थी कि, लेनदेन कर इस तरह की गंभीर अनियमितताएं की जा रही हैं। अब इसमें कई बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर की संभावना बन रही है।

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